इस लघुकथा में आप पढ़ेंगे एक मुलाकात का वो लम्हा जब अधूरी मोहब्बत आकस्मिक सामने दिखाई देती है।
शाम के करीब छह बजे थे। बारिश अभी-अभी रुकी थी। सड़क के किनारे एक छोटी-सी चाय की दुकान पर कुछ लोग बैठे चाय पी रहे थे।
अमन भी वहीं बैठा था।
चाय का पहला घूंट लेते ही उसकी नजर सामने वाली सड़क पर गई। एक लड़की छाता बंद करके तेजी से दुकान की तरफ आ रही थी।
वह कुछ पल के लिए ठिठक गया।
वह नैना थी।
करीब सात साल बाद उसने उसे देखा था।
कभी दोनों एक-दूसरे से घंटों बातें किया करते थे। छोटी-छोटी बातों पर हँसना, बिना किसी वजह के मिलना और भविष्य को लेकर बड़े-बड़े सपने देखना उनकी आदत थी।
फिर एक दिन दोनों के रास्ते अलग हो गए।
न कोई बड़ा झगड़ा हुआ, न कोई शिकायतों की लंबी सूची बनी। बस जिंदगी ने दोनों को अलग-अलग दिशाओं में पहुँचा दिया।
नैना ने भी अमन को देख लिया था।
वह दुकान के अंदर आई और चाय का ऑर्डर दिया।
कुछ पल तक दोनों चुप रहे।
आखिर नैना ने ही पूछा, “कैसे हो?”
अमन मुस्कुराया और बोला, “ठीक हूँ।
तुम कैसी हो? “मैं भी ठीक हूँ।”
बस इतना ही।
कभी जिन दो लोगों के पास बातों की कोई कमी नहीं होती थी, आज उनके पास कहने के लिए कुछ ही शब्द थे।
चाय आ गई। नैना ने कप उठाया और पूछा, “आजकल क्या कर रहे हो?”
अमन ने अपनी जिंदगी के बारे में कुछ बातें बताईं। नैना भी अपने काम और परिवार के बारे में बताने लगी।
दोनों हँसे भी, लेकिन उस हँसी में पहले जैसी बेफिक्री नहीं थी।
कुछ देर बाद नैना ने घड़ी देखी।”अच्छा, अब चलती हूँ। देर हो रही है।”
अमन ने सिर हिलाया।
नैना दुकान से बाहर निकल गई। कुछ कदम चलने के बाद उसने पीछे मुड़कर देखा। अमन वहीं खड़ा था।उसने हल्की-सी मुस्कान दी और आगे बढ़ गई।
अमन वापस अपनी कुर्सी पर बैठ गया।उसने चाय का आखिरी घूंट लिया। चाय ठंडी हो चुकी थी।
उसे याद आया कि कभी नैना कहा करती थी, “तुम्हें पता है, मुझे ठंडी चाय बिल्कुल पसंद नहीं।”वह मुस्कुरा दिया।
सात साल पहले की वह बात आज भी उसे याद थी, लेकिन अब उसे यह भी पता था कि कुछ बातें याद रह जाने का मतलब यह नहीं होता कि उन्हें दोबारा जीना भी जरूरी है।
उस शाम अमन घर लौट आया।
उसने नैना को फोन नहीं किया। न ही कोई पुराना संदेश भेजा।
शायद अब दोनों की जिंदगी में एक-दूसरे के लिए कोई जगह नहीं बची थी।
लेकिन उस दिन उसे एक बात समझ आई।
हर पुराना रिश्ता वापस पाने के लिए नहीं होता। कुछ रिश्ते सिर्फ यह याद दिलाने के लिए होते हैं कि कभी हमारी जिंदगी में कोई ऐसा भी था, जिसके साथ हम बहुत खुश थे।